खेत बचाओ अभियान 2026: 1 से 30 जून देशभर में चल रहा है मिट्टी बचाने का महाअभियान, जानें उद्देश्य, लाभ और किसानों से जुड़ी खास बातें

देश की खेती-किसानी को एक नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने जून 2026 का पूरा महीना ‘खेत बचाओ अभियान’ (Khet Bachao Abhiyan) के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संयुक्त तत्वावधान में 1 जून से 30 जून 2026 तक देशव्यापी यह अभियान चलाया जा रहा है। इसकी शुरुआत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गांव से की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बढ़ते रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से बिगड़ती मिट्टी की सेहत को सुधारना है। आइए, इस लेख में जानते हैं कि यह अभियान क्या है, इसके क्या उद्देश्य हैं, और इससे किसानों को कैसे लाभ होगा।

खेत बचाओ अभियान 2026 Overview

विवरण जानकारी
अभियान का नाम खेत बचाओ अभियान
आयोजक केंद्रीय कृषि मंत्रालय एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
अवधि 1 जून 2026 से 30 जून 2026
उद्घाटनकर्ता केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
उद्घाटन स्थल रामसिया गांव, रायसेन, मध्य प्रदेश
मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाना, रासायनिक खादों का संतुलित उपयोग, जैविक खेती को बढ़ावा, जल संरक्षण
लक्ष्य देश के सभी गांवों तक पहुंच, किसानों को मृदा परीक्षण एवं टिकाऊ खेती की जानकारी
प्रमुख गतिविधियाँ मृदा परीक्षण, जैविक खेती प्रशिक्षण, ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई, वृक्षारोपण

अभियान शुरू करने के पीछे क्या है कारण?

पिछले कुछ दशकों में अधिक पैदावार के चक्कर में किसानों ने रासायनिक उर्वरकों (यूरिया, डीएपी) और कीटनाशकों का इस्तेमाल बेतहाशा बढ़ा दिया है। इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव मिट्टी की सेहत पर पड़ा है। मिट्टी की उपजाऊ क्षमता घट रही है, जमीन के अंदर मौजूद फायदेमंद बैक्टीरिया और मित्र कीट नष्ट हो रहे हैं, जिससे फसलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित हो रही है। इस संकट को ध्यान में रखते हुए सरकार ने किसानों को जागरूक करने और मिट्टी को बचाने के लिए इस महीने भर चलने वाले अभियान की शुरुआत की है।

खेत बचाओ अभियान के मुख्य उद्देश्य (Objectives)

1. मिट्टी की सेहत सुधारना

  • मृदा परीक्षण (Soil Health Card): अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों की 1600 से अधिक टीमें गांवों में जाकर किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड (मृदा स्वास्थ्य कार्ड) के आधार पर खाद डालने की सलाह दे रही हैं। इससे किसान जान सकेंगे कि उनकी जमीन में किस पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश) की कितनी मात्रा है और किस खाद की कितनी जरूरत है।

2. जैविक खेती को बढ़ावा देना

  • जैविक इनपुट्स: किसानों को रासायनिक खादों की जगह ट्राइकोडरमा और वर्टिसिलियम जैसे जैविक उत्पादों (Bio-Fertilizers) का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही, हरी खाद (Green Manure) के उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है, जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है।

3. जल संरक्षण को बढ़ावा देना

  • आधुनिक सिंचाई तकनीक: बढ़ते जल संकट को देखते हुए, इस अभियान के दौरान किसानों को ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation), स्प्रिंकलर सिंचाई (Sprinkler System) और ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (Per Drop More Crop) जैसी जल-बचत तकनीकों की लाइव ट्रेनिंग दी जा रही है।

4. जागरूकता और अन्य पहल

  • नकली खाद-बीज से बचाव: किसानों को नकली एवं मिलावटी खाद एवं बीज से बचने के उपाय बताए जा रहे हैं।

  • सब्सिडी की जानकारी: सरकारी कृषि योजनाओं, मशीनों पर मिलने वाली सब्सिडी और अन्य लाभों के बारे में सीधे किसानों को जानकारी दी जा रही है।

  • वृक्षारोपण: ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम के तहत इस अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जा रहे हैं।

खेत बचाओ अभियान से किसानों को क्या लाभ होगा? (Benefits)

लाभ विवरण
खर्च में कमी संतुलित खाद प्रयोग से यूरिया/डीएपी जैसे महंगे रसायनों पर होने वाला खर्च घटेगा।
पैदावार में वृद्धि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बने रहने से दीर्घकालिक उत्पादन बेहतर होगा।
फसल की गुणवत्ता बेहतर संतुलित पोषण और जैविक खेती से स्वास्थ्यवर्धक एवं अधिक उपज देने वाली फसलें उगाई जा सकेंगी।
पर्यावरण संरक्षण रासायनिक उर्वरकों के कम प्रयोग से मिट्टी, पानी और पर्यावरण प्रदूषण कम होगा।
टिकाऊ खेती जल संरक्षण और जैविक तरीकों से आने वाली पीढ़ियों के लिए खेती बनी रहेगी।
सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों को सब्सिडी और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की सही जानकारी मिल सकेगी।

अभियान की प्रमुख गतिविधियाँ (Activities)

  • गांव स्तरीय कार्यशालाएं: कृषि वैज्ञानिक गांवों में जाकर मिट्टी परीक्षण, जैविक खेती और जल संरक्षण पर कार्यशालाएं आयोजित कर रहे हैं।

  • प्रदर्शन (Demonstration): वैज्ञानिक किसानों को ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर और जैविक खाद बनाने की विधियों का लाइव प्रदर्शन कर रहे हैं।

  • जनसंपर्क: 1600 से अधिक टीमें सीधे किसानों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुन रही हैं और उनका समाधान बता रही हैं।

  • सामग्री वितरण: इस अभियान के तहत किसानों को मृदा परीक्षण किट, जैविक उत्पादों के नमूने और जल संरक्षण उपकरणों के बारे में जानकारी दी जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: खेत बचाओ अभियान क्या है?
उत्तर: यह केंद्र सरकार का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है, जो 1 जून से 30 जून 2026 तक चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाना, रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकना और किसानों को टिकाऊ खेती के लिए प्रशिक्षित करना है।

प्रश्न 2: यह अभियान किसने और कहाँ से शुरू किया?
उत्तर: इस अभियान की शुरुआत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गांव से की है।

प्रश्न 3: इस अभियान का सबसे बड़ा लाभ किसानों को क्या है?
उत्तर: इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान मृदा परीक्षण के आधार पर ही खाद डालेंगे, जिससे उनकी खेती की लागत कम होगी, पैदावार बेहतर होगी और मिट्टी की सेहत लंबे समय तक अच्छी रहेगी।

प्रश्न 4: क्या इस अभियान के तहत किसानों को जैविक खेती सिखाई जा रही है?
उत्तर: हाँ, अभियान के तहत किसानों को जैविक उत्पादों (ट्राइकोडरमा, वर्टिसिलियम) और हरी खाद का उपयोग करने के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित किया जा रहा है।

प्रश्न 5: क्या इस अभियान में जल संरक्षण को भी शामिल किया गया है?
उत्तर: जी हाँ, गिरते भूजल स्तर को देखते हुए, इस अभियान के दौरान किसानों को ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर और ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ जैसी जल-बचत तकनीकों की ट्रेनिंग दी जा रही है।

प्रश्न 6: क्या इस अभियान की कोई विशेष थीम है?
उत्तर: इस अभियान के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम पर भी बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

निष्कर्ष

खेत बचाओ अभियान किसानों, मिट्टी और पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान न केवल किसानों को खेती की आधुनिक एवं टिकाऊ तकनीकों से अवगत करा रहा है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी सशक्त बना रहा है। यह सरकारी प्रयास देश की कृषि व्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। सभी किसान इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपनी मिट्टी को बचाने के लिए आगे आएं।

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